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अजीत अंजुम ने मृणाल पांडे को दी नसीहत, तो मिला ये जवाब...

रविवार को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान संपादक मृणाल पांडे ने एक ट्वीट किया...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 18 September, 2017
Last Modified:
Monday, 18 September, 2017


समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

रविवार को हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान संपादक मृणाल पांडे ने एक ट्वीट किया, जिस पर दिनभर सोशल मीडिया पर चर्चा होती रही, पर ये मामला बढ़ तब गया जब इंडिया टीवी के पूर्व मैनेजिंग एडिटर और बीईए के सेकेट्ररी अजीत अंजुम ने मृणाल पांडे के उस ट्वीट पर उन्हें कुछ सलाह दे डाली।

जवाब में मृणाल पांडे ने अजीत अंजुम को अपने ट्विटर हैंडल पर ब्लॉक कर दिया। बस फिर क्या था अजीत अंजुम ने मृणाल पांडे के इस कदम पर फेसबुक पर एक पोस्ट लिख मृणाल पांडे पर सीधा वार किया। उसके बाद से दोनों के समर्थक पत्रकारों-संपादकों एक-दूसरे के पक्ष में सोशल मीडिया पर कैंपने चला रखा है...


अब हम आपके साथ सोशल मीडिया पर उनके द्वारा किए गए पोस्ट क्रमवर बता रहे हैं...सबसे पहले देखिए वे ट्वीट जिस पर अजीत अंजुम ने एतराज जताया था।

               


मृणाल पांडे के इस ट्वीट पर अजीत अंजुम ने उन्हें नसीहत देते हुए लिखा कि कल पीएम मोदी का जन्मदिन था . देश -दुनिया में उनके समर्थक /चाहने वाले /नेता/कार्यकर्ता /जनता /मंत्री /सासंद / विधायक जश्न मना रहे थे . उन्हें अपने -अपने ढंग से शुभकामनाएँ दे रहे थे . ये उन सबका हक़ है जो पीएम मोदी को मानते -चाहते हैं . ट्वीटर पर जन्मदिन की बधाई मैंने भी दी . ममता बनर्जी और राहुल गांधी से लेकर तमाम विरोधी नेताओं ने भी दी . आप न देना चाहें तो न दें , ये आपका हक़ है . भारत का संविधान आपको पीएम का जन्मदिन मनाने या शुभकामनाएँ देने के लिए बाध्य नहीं करता . आप जश्न के ऐसे माहौल से नाख़ुश हों , ये भी आपका हक़ है . लेकिन पीएम मोदी या उनके जन्मदिन पर जश्न मनाने वाले उनके समर्थकों के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करें , ये क़तई ठीक नहीं ...हम -आप लोकतंत्र की बात करते हैं . आलोचना और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करते हैं ..लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल के वक्त आप जैसी ज़हीन पत्रकार /लेखिका और संपादक अगर अपनी नाख़ुशी या नापसंदगी ज़ाहिर कहने के लिए ऐसे शब्दों और चित्रों का प्रयोग करेगा .. पीएम के समर्थकों की तुलना गधों से करेगा तो कल को दूसरा पक्ष भी मर्यादाओं की सारी सीमाएँ लाँघकर हमले करेगा तो उन्हें ग़लत किस मुँह से कहेंगे ...सीमा टूटी तो टूटी . कितनी टूटी , इसे नापने का कोई इंची -टेप नहीं है ...सोशल मीडिया पर हर रोज असहमत आवाजों या विरोधियों की खाल उतारने और मान मर्दन करने के लिए हज़ारों ट्रोल मौजूद हैं ..हर तरफ़ /हर खेमे में ऐसे ट्रोल हैं . ट्रोल और आपमें फ़र्क़ होना चाहिए ...

आप साप्ताहिक हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान की संपादक रही हैं . हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा पर आपकी ज़बरदस्त पकड़ है . फिर अभिव्यक्ति के लिए ऐसी भाषा और ऐसे प्रतीक क्यों चुने आपने ? सवाल आपके आक्रोश या आपकी नाराज़गी का नहीं है .अभिव्यक्ति के तरीक़े पर है 

अपने नेता की जयंती पर कोई जश्न मनाए,ये उनका हक़ है.जश्न पर असहमति आपका हक़ है..लेकिन असहमति का ये तरीक़ा आपके स्तर को ही नीचे गिराता है . मृणाल जी,मर्यादा की सारी सीमाएँ लाँघने वाले ट्रोल और आपमें कोई तो फ़र्क़ होना चाहिए .

आप तो इतनी सीनियर पत्रकार/संपादक रही हैं.फिर ये क्या?आलोचना/विरोध और असहमति का ये स्तर?आप जैसी ज़हीन पत्रकार/संपादक पीएम के लिए ऐसी टिप्पणी करें , शोभा नहीं देता। 

इस नसीहत के बाद मृणाल पांडे ने अजीत अंजुम को अपने ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया। ब्लॉक होने के बाद अजीत अंजुम चुप नहीं बैठे और उन्होंने मृणाल पांडे  के नाम एक पत्र लिख  डाला जो आप नीचे पढ़ सकते हैं।





 

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जानिए, कैसे पढें अपने मोबाइल में दोस्तों के वॉट्सऐप मैसेज...

अपने दोस्तों के वॉट्सऐप मैसेज पढ़ने का ख्याल शायद आपके दिमाग में कई बार आया होगा...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 November, 2017
Last Modified:
Wednesday, 15 November, 2017
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अपने दोस्तों के वॉट्सऐप मैसेज पढ़ने का ख्याल शायद आपके दिमाग में कई बार आया होगा। यदि हां, तो ये रिपोर्ट आपके लिए है, क्योंकि अब आप चुपचाप अपने के दोस्तों के वॉट्सऐप मैसेज को अपने मोबाइल पर पढ़ सकते हैं।  

दरअसल, इसके लिए सबसे पहले आपके दोस्त के फोन में Whatscan For Whatsapp का होना जरूरी है और यदि नहीं है तो आपको दोस्त के मोबाइल में गूगल प्ले-स्टोर से इस ऐप को अपनी भाषा में इंस्टॉल करना होगा, जिसके बाद आपसे एक पासवर्ड बनाने को कहा जाएगा। पासवर्ड बनाने के बाद आपको ऐप में एक क्यूआर कोड दिखेगा। यह वही क्यूआर कोड है जिसकी मदद से आप दूसरे के वॉट्सऐप के मैसेज अपने स्मार्टफोन में पढ़ सकते हैं।

अब उस मोबाइल का वॉट्सऐप खोलें, जिसका मैसेज आपको अपने मोबाइल में पढऩा है। अब उस मोबाइल के व्हाट्सऐप में जाकर वॉट्सएप वेब पर क्लिक करें। अब आपको एक क्यूआर स्कैनर का ऑप्शन दिखेगा। उस क्यूआर कोड को स्कैन करें। क्यूआर कोड के स्कैन होते ही आपके मोबाइल में दूसरे मोबाइल का वॉट्सऐप ठीक उसी प्रकार चलने लगेगा, जैसा कि आप वॉट्सऐप को डेस्कटॉप या कंप्यूटर पर चलाते हैं।  


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गूगल ने इस तरह की आपकी परेशानी दूर...

गूगल क्रोम का इस्तेमाल कर रहे यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 11 November, 2017
Last Modified:
Saturday, 11 November, 2017
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

गूगल क्रोम का इस्तेमाल कर रहे यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है। गूगल ने काफी समय बाद अपने सर्च इंजन क्रोम में एक ऐसा फीचर ऐड किया है जो आपको काफी पसंद आएगा।  

गूगल के मुताबिक अब वो क्रोम ब्राउजर में जबरदस्ती वेबसाइट रिडायरेक्ट को रोकेगा। यानी पहले आप किसी वेबसाइट को ओपन करते थे, तो आप विज्ञापनों के लिए अचानक ही दूसरी वेबसाइट पर पहुंच जाते थे। इसी को रिडायरेक्ट कहा जाता है।

मुमकिन है कि आपके साथ भी यह समस्या आई होगी, क्योंकि यह काफी आम है।

गूगल के प्रोडक्ट मैनेजर ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि कंपनी ने क्रोम यूजर्स के फीडबैक के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने कहा है, ‘डेस्कटॉप के हर 5 में से एक 1 क्रोम ब्राउजर यूजर ने अनचाहे कॉन्टेंट दिखाए जाने को लेकर रिपोर्ट किया है।’

गूगल के मुताबिक, वेब पेज अक्सर किसी अनचाहे विज्ञापनों और वेबसाइट्स पर रिडायरेक्ट करते हैं और ऐसा पेज पर थर्ड पार्टी कॉन्टेंट होने की वजह से होता है। दरअसल वेबपेज किसी थर्ड पार्टी कंटेंट वेबसाइट या विज्ञापन पर पहुंच जाती है और हर 5 में से एक क्रोम यूजर अनचाहे कंटेंट को लेकर परेशान है। ऐसे में Chrome 64 वर्जन में गूगल रिडायरेक्ट की इस प्रॉब्लम को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। इस अपडेट में रिडायरेक्ट पेज पर पहुंचाने की जगह एक इनफोबार दिखाया जाएगा।

इसके साथ ही गूगल भविष्य में होने वाले अपडेट में हिडेन क्लिक बेट को भी हटाएगा। आपको बता दें कि हिडेन क्लिक बेट वो होते हैं, जो दिखाई नहीं, देते हैं, लेकिन आप किसी वेब पेज पर कहीं भी क्लिक करें, ये आपको रिडायरेक्ट करके किसी स्पैम वेबसाइट या विज्ञापन पर पहुंचा देत हैं। गूगल इस तरह के रिडायरेक्ट प्रॉब्लम्स को भी खत्म कर रहा है।

गूगल अपने यूजर्स से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर काम कर रहा है। ये बदलाव गूगल क्रोम के 64 और 65 वर्जन के साथ दिए जाएंगे और यूजर्स को गूगल क्रोम पर थर्ड पार्टी के अनॉइंग ऐड्स से राहत मिलेगी।


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अब फेसबुक ने लॉन्च किया ये नया फीचर...

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने अपने ऐप को यूजर फ्रेंडली बनाने की कवायद के तहत अब एक...

Last Modified:
Monday, 16 October, 2017
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने अपने ऐप को यूजर फ्रेंडली बनाने की कवायद के तहत अब एक ऐसा फीचर जोड़ा है जिसके साथ यूजर किसी दूसरे ऐप पर जाने की बजाए फेसबुक के जरिए ही सारे काम कर सकेंगे। फेसबुक ने अपने यूजर्स के लिए एक और नया फीचर रिलीज किया है, जिसके जरिए यूजर्स अब आसानी से अपना मनपसंद खाना ऑर्डर कर सकेंगे।

फेसबुक ने इस नए फीचर की शुरुआत करते हुए, इस क्षेत्र में पहले से काम कर रही कंपनियों के साथ साझेदारी की है, जिसमें ईटस्ट्रीट, डिलीवरी.कॉम, डोडैश, ओलो सहित कई कंपनियां शामिल हैं। फेसबुक इस फीचर की टेस्टिंग पिछले कई महीनों से कर रहा था, लेकिन अब इसे एंड्रॉयड, आईओएस और डेस्कटॉप यूजर्स के लिए रिलीज कर दिया गया है, हालांकि यह फीचर फिलहाल केवल अमेरिका में ही लाइव है। जल्द ही दूसरे देशों में इसे रोलआउट किया जाएगा।

कैसे बुक करें खाना

यूजर को फेसबुक ऐप के एक्स्प्लोर टैब में 'ऑर्डर फूड' का ऑप्शन मिलेगा, जिसमें यूजर को आस पास के मौजूद रेस्टोरेंट की लिस्ट मिलेगी। एक बार रेस्टोरेंट पसंद आने के बाद यूजर 'स्टार्ट ऑर्डर' में जाकर अपना ऑर्डर बुक कर, बेहतरीन खाने का आनंद सकेंगे।

इस फीचर के साथ ही यूजर को उस रेस्टोरेंट के बारे में अन्य कस्टमर्स के रिव्यु भी मिलेंगे, जिससे यूजर को अच्छा रेस्टोरेंट चुनने में मदद मिलेगी।  


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सोशल मीडिया पर लिखने के चक्‍कर में एंकर पर लगा दो सप्‍ताह का बैन

स्‍पोर्ट्स चैनल ‘ईएसपीएन’ (ESPN) ने सोशल मीडिया को लेकर बनी गाइडलाइंस के उल्‍लंघन...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 October, 2017
Last Modified:
Wednesday, 11 October, 2017
Samachar4media

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

स्‍पोर्ट्स चैनल ‘ईएसपीएन’ (ESPN) ने सोशल मीडिया को लेकर बनी गाइडलाइंस के उल्‍लंघन के आरोप में अपनी एंकर जेमीले हिल (Jemele Hill) को दो सप्‍ताह के लिए सस्‍पेंड कर दिया है।

नेटवर्क की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘सोशल मीडिया को लेकर हमने जो गाइडलाइंस बना रखी हैं, हिल ने दूसरी बार उनका उल्‍लंघन किया है, इसलिए यह कार्रवाई की गई है।’  

अफ्रीकन-अमेरिकन हिल शाम छह बजे प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘स्‍पोर्ट्स सेंटर’ की सह प्रस्‍तोता हैं। पिछले महीने अमेरिकी राष्‍ट्रपति के रंग को लेकर की गई टिप्‍पणियों को लेकर भी काफी बवाल मचा था। इस कार्रवाई के बाद अब हिल इस शो को दो सप्‍ताह तक पेश नहीं कर सकेंगी।

गौरतलब है कि ‘ईएसपीएन’ के चीफ जॉन स्किपर (John Skipper) ने पूरे स्‍टाफ को एक संदेश भेजा था, जिसमें कहा गया था कि ‘चैनल सिर्फ खेल के बारे में है और यह कोई राजनीतिक संगठन नहीं है।’ इसके अलावा ‘ईएसपीएन’ की पैरेंट कंपनी ‘डिज्‍नी’के सीईओ बॉब आइजर (Bob Iger) ने हिल के ट्वीट के लिए उनसे सहानुभूति जताई थी। वहीं अब दोबारा से सोशल मीडिया पर राजनीतिक ट्वीट करने के लिए चैनल ने उनके खिलाफ ये कार्रवाई की है।

 

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ट्विटर जल्द ही अपने यूजर्स को देगा ये तोहफा...

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने अपने यूजर्स के लिए एक खुशखबरी दी है। ट्विटर ने पोस्ट के लिए कैरेक्टर साइज ...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 27 September, 2017
Last Modified:
Wednesday, 27 September, 2017
twitter

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने अपने यूजर्स के लिए एक खुशखबरी दी है। ट्विटर ने पोस्ट के लिए कैरेक्टर साइज बढ़ाने का फैसला लिया है। अभी ट्विटर की कैरेक्टर लिमिट 140 है और अब इसे बढ़ाकर दोगुना यानी 280 कर दिया जाएगा। इसके लिए ट्विटर ने टेस्टिंग शुरू कर दी है।

इस बात की जानकारी ट्विटर ने अपने ऑफिशियल ट्वीट के माध्यम से दी है। सैन फ्रांसिस्को-बेस्ड ट्विटर ने कहा कि एसएमएस के दिनों से ही ट्वीट में करैक्टर्स की संख्या लिमिटेड थी। शुरुआत में 160 करैक्टर होने के बाद इसकी संख्या 140 पर सीमित कर दी गई थी। वहीं, करैक्टर्स की संख्या लिमिटेड होने की वजह से कई बार यूजर्स को कुछ खास शब्द डिलीट करना पड़ता है। ऐसे में जब 140 करैक्टर की सीमा से यूजर्स आजाद हो जाएंगे तो कई नए लोग ट्विटर से जुड़ेंगे।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ट्विटर ने करैक्टर की संख्या बढ़ाने की ओर कदम बढ़ाया है। इससे पहले भी ट्विटर करैक्टर की संख्या 10 हजार करने पर गंभीरता से विचार कर रहा था। उस समय सीईओ जैक डोर्सी ने आखिरी समय में अपने कदम पीछे कर लिए थे और वह अपडेट लागू नहीं हो पाया था। 


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‘FACEBOOK’ ने अपने मैसेंजर से हटाया ये फीचर

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक अपने यूज़र्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर नए फीचर्स लेकर आती है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 September, 2017
Last Modified:
Saturday, 16 September, 2017
Samachar4media

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक अपने यूज़र्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर नए फीचर्स लेकर आती है, लेकिन अब जानकारी मिली है कि फेसबुक ने अपने मैसेंजर से ‘इंस्‍टेंट आर्टिकल’ के फीचर को हटा दिया है। इंस्‍टेंट आर्टिकल को वर्ष 2015 में लॉन्‍च किया गया था लेकिन अब यूज़र्स न तो इसका इस्तेमाल कर सकेंगे और न ही इसे देख सकेंगे।

इस बारे में फेसबुक के प्रवक्‍ता का कहना है कि लोगों और प्रकाशकों पर ज्यादा प्रभाव डालने के लिए इंस्‍टेंट आर्टिकल की समीक्षा और सुधार किया जा रहा है। फेसबुक कोर ऐप में इंस्‍टेंट आर्टिकल के निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है और मैसेंजर में यह फीचर नहीं दिया जा रहा है।


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'हिन्दीपन' के साथ अंग्रेजी सीखे तो राम को राम कहेंगे-कृष्ण को कृष्ण, वरना तो...

भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। बल्कि, इससे इतर भी बहुत कुछ है। भाषा की अपनी पहचान है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 September, 2017
Last Modified:
Thursday, 14 September, 2017
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- लोकेन्द्र सिंह ।।


भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। बल्कि, इससे इतर भी बहुत कुछ है। भाषा की अपनी पहचान है और उस पहचान से उसे बोलने वाले की पहचान भी जुड़ी होती है। यही नहीं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक भाषा का अपना संस्कार होता है। प्रत्येक व्यक्ति या समाज पर उसकी मातृभाषा का संस्कार देखने को मिलता है। जैसे हिन्दी भाषी किसी श्रेष्ठ, अपने से बड़ी आयु या फिर सम्मानित व्यक्ति से मिलता है तो उसके प्रति आदर व्यक्त करने के लिए 'नमस्ते' या 'नमस्कार' बोलता है या फिर चरणस्पर्श करता है। 'नमस्ते' या 'नमस्कार' बोलने में हाथ स्वयं ही जुड़ जाते हैं। यह हिन्दी भाषा में अभिवादन का संस्कार है। अंग्रेजी या अन्य भाषा में अभिवादन करते समय उसके संस्कार और परंपरा परिलक्षित होगी। इस छोटे से उदाहरण से हम समझ सकते हैं कि कोई भी भाषा अपने साथ अपनी परंपरा और संस्कार लेकर चलती है।

 

किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति से होती है। संस्कृति क्या है? हमारे पूर्वजों ने विचार और कर्म के क्षेत्र में जो भी श्रेष्ठ किया है, उसी धरोहर का नाम संस्कृति है। यानी हमारे पूर्वजों ने हमें जो संस्कार दिए और जो परंपराएं उन्होंने आगे बढ़ाई हैं, वे संस्कृति हैं। किसी भी देश की संस्कृति उसकी भाषा के जरिए ही जीवित रहती है, आगे बढ़ती है। जिस किसी देश की भाषा खत्म हो जाती है तब उस देश की संस्कृति का कोई नामलेवा तक नहीं बचता है। यानी संस्कृति भाषा पर टिकी हुई है।

 

भारत में अंग्रेजी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, ऐसा कहा जाता है। दरअसल, यह नुकसान अंग्रेजी भाषा से कहीं अधिक उसके संस्कार और परंपरा ने पहुंचाया है। अंग्रेजी के स्वभाव के लिए एक शब्द है 'अंग्रेजियत'। भारत का सबसे अधिक नुकसान अंग्रेजी ने नहीं बल्कि उसके स्वभाव अंग्रेजियत ने किया है। इसलिए जब हम हिन्दी को सम्मानित स्थान दिलाने की बात करते हैं तो हमारा किसी भाषा से विरोध नहीं है। बल्कि, हम हिन्दी से आए अपने संस्कारों के प्रति आग्रही हैं।

 

भाषा तो जितनी सीखी जा सकती हैं, सीखनी ही चाहिए। लेकिन एक बात ध्यान रखने की है कि जब हम किसी भाषा को सीखते हैं तो उसके 'एटीट्यूड' (प्रवृत्ति) को भी सीखते हैं। विदेशी भाषा सीखने के दौरान हमें उसके एटीट्यूड को इस तरह लेना चाहिए कि वह हमारी भाषा के एटीट्यूड पर हावी न हो पाए। अगर यह कर सके तो कोई दिक्कत नहीं। यह सब करने के लिए हमें अपनी मातृभाषा के एटीट्यूड को ज्यादा अच्छे से समझ लेना चाहिए बल्कि उससे अधिक प्रेम कर लेना चाहिए। हिन्दी का आंदोलन चलाने वाले प्रख्यात पत्रकार वेदप्रताप वैदिक अपनी पुस्तक 'अंग्रेजी हटाओ, क्यों और कैसे' में लिखते हैं- 'जब आप विदेशी भाषा से इश्क फरमाते हैं तो वह उसकी पूरी कीमत वसूलती है। वह अपने आदर्श, अपने मूल्य आप पर थोपने लगती है। यह काम धीरे-धीरे होता है। सौंदर्य के उपमान बदलने लगते हैं। दुनिया को देखने की दृष्टि बदल जाती है। आदर्श और मूल्य बदल जाते हैं... आप रहते तो भारतीय परिवेश में लेकिन बौद्धिक रूप से समर्पित होते हैं अंग्रेजी परिवेश के प्रति। ऐसा व्यक्त्वि सृजनशील नहीं बन पाता है।'

 

हिन्दी को सम्मान दिलाने के लिए, उसकी श्रेष्ठता साबित करने के लिए हमें उसके स्वभाव को समझ लेना चाहिए। हिन्दी का स्वभाव, उसकी पहचान और उसके संस्कार को'हिन्दीपन' कह सकते हैं। यह बहुत सहज है, सरल है। बनावटी बिल्कुल नहीं है। भारतीय परंपरा और संस्कृति इस शब्द में परिलक्षित होती है। 'हिन्दीपन' हमेशा ध्यान रखा तो दूसरी विदेशी भाषाएं सीखते समय उनका स्वभाव हम पर हावी नहीं हो सकेगा। हम'हिन्दीपन' के साथ अच्छी अंग्रेजी बोल-पढ़ और लिख सकेंगे। ऐसे में हम 'अंग्रेजीदां' होने से भी बच जाएंगे। हिन्दी का साथ नहीं छूटेगा। हम अंग्रेजी बोलने के बाद भी 'हिन्दी' ही कहलाएंगे। हिन्दीपन को जीवित रखा तो अपनी माटी से हम जुड़े रहेंगे। 'हिन्दीपन' के साथ अंग्रेजी सीखे तो राम को राम कहेंगे, कृष्ण को कृष्ण। वरना तो बरसों से अंग्रेजीदां लोगों के लिए राम 'रामा' हो गए और कृष्ण 'कृष्णा'।

 

भारत भी उनके लिए कब का 'इंडिया' हो चुका है। भारत को भारत या हिन्दुस्थान कहने का विरोध वे ही लोग करते हैं, जिनमें'हिन्दीपन' बचा नहीं रहा है। अगर हिन्दीपन के महत्व को हमने समझ लिया तो एक और महत्वपूर्ण कार्य यह हो जाएगा कि सभी भारतीय भाषाएं एक साथ खड़ी हो जाएंगी। क्योंकि,सबका स्वभाव तो 'हिन्दी' ही है। यानी इस देश की माटी की सुगन्ध सभी भाषाओं में है। सब भाषाएं हिन्दुस्थान की माटी में उसकी हवा-पानी से सिंचित हैं। सबका विकास भारतीय परिवेश में ही हुआ है- इसलिए सबका संस्कार एक जैसा होना स्वभाविक है। हिन्दीपन के साथ हम भारतीय भाषाओं के बीच खड़ी की गई दीवार को भी गिरा सकते हैं। अच्छी अंग्रेजी के जानकार और विलायत में पढ़े-लिखे महात्मा गांधी ने आजीवन 'हिन्दीपन' को संभाले रखा। इसीलिए गुजराती भाषी होने के बावजूद वे हिन्दी से अथाह प्रेम करते रहे। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अथक प्रयास भी उन्होंने किए। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी गुजराती भाषी हैं लेकिन हिन्दी के सम्मान को बढ़ाने का काम वे भी बखूबी कर रहे हैं।

 

भाषा नागरिकता की पहचान भी होती है। मशहूर कवि इकबाल ने भी कहा था कि'हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा'। यहां इकबाल ने भारत के नागरिकों को हिन्दी कहकर संबोधित किया है। भारत में रहने वाले प्रत्येक समाज-पंथ-धर्म के लोगों की भारत के बाहर पहचान 'भारतीय' ही है। यानी 'हिन्दी'। भले ही स्वार्थ की राजनीति करने वाले, विभेद पैदा करके प्रसन्न रहने वाले लोग भारत की नागरिकता 'भारतीयता' के नाम पर विभिन्न पंथ के अनुयायियों के बीच वैमनस्यता फैलाने का प्रयास करते हों, लेकिन यह सच है कि भारत के बाहर हिन्दू-मुसलमान-ईसाई सबकी पहचान भारतीयता ही है। अरब देशों में जाने वाले मुसलमानों, खासकर हज के लिए जाने वाले मुसलमानों को वहां की शासन व्यवस्था और स्थानीय नागरिक सभी 'हिन्दी मुसलमान' के नाते पहचान करते हैं। यानी 'हिन्दी'केवल हिन्दी बोलने वाले, हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग ही नहीं हैं बल्कि भारत में रहने वाले समस्त लोग 'हिन्दी' में शामिल हैं। इस नाते हिन्दी महज अभिव्यक्ति का साधन नहीं है बल्कि यह लोगों को जोडऩे का एक सेतु भी है। हिन्दी हमें पंथ-धर्म से ऊपर उठाकर एकसाथ लाती है। और हिन्दीपन इस भाषा की आत्मा है, जो हमें अधिक सरल, उदार और श्रेष्ठ बनाए रखता है।


(लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक हैं)



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सरकार के खिलाफ लेख-विडियो पोस्ट करने पर सीधे चार्जशीट!

सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ कोई लेख या विडियो पोस्ट किया, तो अब आपको महंगा पड़ सकता है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 September, 2017
Last Modified:
Tuesday, 05 September, 2017
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

सोशल मीडिया पर राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ कोई लेख या विडियो पोस्ट किया, तो अब आपको महंगा पड़ सकता है। दरअसल, राज्य सरकार छवि खराब करने, अनर्गल बयानबाजी करने और आला अफसरों के खिलाफ अपशब्द का इस्तेमाल करने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर सीधे कार्रवाई के मूड में है।

इस तरह के अफसरों और कर्मचारियों को सीधे चार्जशीट दी जाएगी। इसको लेकर कार्मिक विभाग ने फाइल तैयार कर आगे बढ़ा दी है। गाइडलाइन और उल्लंघन पर कार्रवाई का स्वरूप तय होने के बाद फाइल मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजी जाएगी और यहां से मंजूरी मिलने के बाद आदेश जारी किया जाएगा। 


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कांग्रेस के सवाल पर ट्विटर यूजर्स ले रहे हैं यूं मजा...

कांग्रेस पार्टी ने अपनी ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए ट्विटर यूजर्स से एक सवाल पूछा है। कांग्रेस ...

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Published - Monday, 04 September, 2017
Last Modified:
Monday, 04 September, 2017
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

कांग्रेस पार्टी ने अपनी ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए ट्विटर यूजर्स से एक सवाल पूछा है। कांग्रेस को लेकर इस तरह के सवाल अक्सर इस ट्विटर हैंडल के जरिए पूछे जाते हैं। पर आज पूछे गए सवाल पर कांग्रेस को मुहं की खानी पड़ रही है। उसका मजाक खुद ब खुद बन रहा है।

असल में मामला ये है कि कांग्रेस के ट्विटर हैंडल पर सवाल पूछा गया कि सन् 1958 में भूटान में अच्छी सड़कों के अभाव में प्रधानमंत्री नेहरू ने किस जानवर पर बैठकर देश का दौरा किया था? ये सवाल को ठीक है पर इसके विकल्पों में घोड़ा, याक, हाथी और गधा विकल्प दिया है।

इस सवाल का सही जवाब है याक। कई बार सोशल मीडिया पर भी पं. नेहरू की याक पर बैठी ये तस्वीर वायरल भी हो चुकी है। पर ट्विटर यूजर्स मजे के मूड में है इसलिए अधिकर इस सवाल का जवाब गधा दे रहे हैं।

कांग्रेस के आईटीसेल की इस लापरवाही के चलते आज पं. नेहरू को ट्विटर यूजर्स ने गधे की सवारी करा दी है। आप भी ये ट्वीट नीचे देख सकते हैं...


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रोती-बिलखती बच्ची के वायरल होते वि‍डियो पर सामने आया परिवार, दी ये सफाई

सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने पिछले दिनों वायरल हुए एक विडियो को जरूर देखा होगा...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 August, 2017
Last Modified:
Wednesday, 23 August, 2017
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समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने पिछले दिनों वायरल हुए एक विडियो को जरूर देखा होगा, जिसमें तीन साल की मासूम बच्‍ची पढ़़ाई करते समय जोर-जोर से रो रही है। दरअसल, एक महिला बच्‍ची को पढ़ा रही है और अंग्रेजी के शब्‍द याद न कर पाने के कारण वह उसे चांटा मारते हुए दिखाई देती है। हालांकि बच्‍ची बार-बार महिला से प्यार से पढ़ाने की गुजारिश कर रही है लेकिन महिला पर इसका कोई असर नहीं होता है।

कई लोगों ने इस विडियो में बच्‍चे के साथ हो रहे व्‍यवहार पर आलोचना की थी और बच्‍चे के परिवार को संयम से काम लेने की सलाह दी थी, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि यह विडियो बॉलिवुड सिंगर तोशी और शारिब साबरी की भांजी का है। इस बच्ची का नाम हया है।

तमाम आलोचनाओं को लेकर गायक तोशी का कहना है, ‘हमारे परिवार को बिल्‍कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह विडियो इतना वायरल हो जाएगा। य‍ह विडियो वॉट्सएप फैमिली ग्रुप से वायरल हुआ है, जहां हया की मां अपने भाई और पति को विडियो के जरिये बताना चाह रही थी कि बच्ची बहुत जिद्दी हो गई है। तोशी ने अपने इस बयान में कहा है कि हया अभी 3 साल की है और यह कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसा हर घर में होता है।’

तोषी के अनुसार, हया को नर्सरी में नंबर सीखने का होमवर्क मिला था और वह सीख नहीं पा रही थी। वह रोने का नाटक कर रही थी ताकि उसकी मां उसे पढ़ाए नहीं और उसे खेलने के लिए जाने दे। तोषी इसे गलत नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि हर घर में बच्चे इस तरह की जिद करते हैं और इस छोटे से विडियो के जरिये किसी के बारे में राय बनाना ठीक नहीं है।

तोषी का कहना है, ‘ जब विडियो देखकर बाकी लोगों को अजीब लग रहा है तो वो महिला को उसकी मां है और एक मां की ममता को आप डेढ़ मिनट के विडियो में जज नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने यह भी सवाल किया कि अगर बच्‍चे जिद करेंगे तो उनका पढ़ाना-लिखाना छोड़ देंगे क्‍या?  बच्‍चों को पालना आसान नहीं होता है। मैं भी एक बेटे का पिता हूं और मुझे पता है कि बच्‍चों को बड़ा करना कितना मुश्किल काम है। मां-बाप को एक साथ दोहरी जिम्‍मेदारी निभानी होती है, जिसमें बच्‍चों और घर की देखभाल दोनों शामिल होती है।’  

 

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